SIP Calculator: ₹5,000 की SIP से लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना मुमकिन है। यही रकम 1 करोड़ तक पहुंच सकती है, लेकिन 10%, 12% और 15% रिटर्न में कितना समय लगेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: अगर हर महीने ₹5,000 निवेश किए जाएं तो लंबे समय में बड़ा फंड बनाया जा सकता है। अब सवाल है कि इसी रकम से ₹1 करोड़ का लक्ष्य कितने समय में हासिल हो सकता है।
यह समय निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करेगा। 10%, 12% और 15% सालाना रिटर्न के हिसाब से देखें तो तीनों स्थितियों में काफी अंतर आता है।
₹5,000 की SIP से ₹1 करोड़ का कैलकुलेशन
| सालाना रिटर्न | ₹1 करोड़ बनने में समय | कुल निवेश | अनुमानित रिटर्न |
| 10% | 28 साल 11 महीने | ₹17.35 लाख | ₹82.65 लाख |
| 12% | 25 साल 6 महीने | ₹15.30 लाख | ₹84.70 लाख |
| 15% | 21 साल 11 महीने | ₹13.15 लाख | ₹86.85 लाख |
10% रिटर्न पर 1 करोड़
अगर ₹5,000 हर महीने निवेश किए जाएं और औसतन 10% सालाना रिटर्न मिले, तो ₹1 करोड़ का फंड तैयार होने में करीब 28 साल 11 महीने लगेंगे। इस दौरान आपकी कुल निवेश राशि करीब ₹17.35 लाख होगी। वहीं, कंपाउंडिंग के असर से करीब ₹82.65 लाख की रकम रिटर्न के तौर पर जुड़ सकती है।
12% रिटर्न पर कितना समय लगेगा?
12% सालाना रिटर्न की स्थिति में ₹5,000 की मासिक SIP से ₹1 करोड़ का लक्ष्य करीब 25 साल 6 महीने में पूरा हो सकता है। इस अवधि में कुल निवेश करीब ₹15.30 लाख होगा। वहीं करीब ₹84.70 लाख की रकम रिटर्न से बन सकती है।
15% रिटर्न पर 1 करोड़
अगर औसत सालाना रिटर्न 15% रहता है तो ₹1 करोड़ का लक्ष्य करीब 21 साल 11 महीने में हासिल हो सकता है। इस मामले में कुल निवेश करीब ₹13.15 लाख होगा। वहीं करीब ₹86.85 लाख की रकम रिटर्न से मिल सकती है।
5% से रिटर्न में बड़ा फर्क
10% और 15% रिटर्न के बीच सिर्फ 5 प्रतिशत अंक का अंतर है। लेकिन ₹1 करोड़ तक पहुंचने में करीब 7 साल का फर्क आ जाता है। यही लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की ताकत दिखाता है। निवेश की रकम ₹5,000 ही रहती है, लेकिन समय और रिटर्न बदलने से अंतिम रकम तक पहुंचने की रफ्तार काफी बदल जाती है।
SIP में किन बातों का ध्यान रखें
- सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करें कि पैसा किस जरूरत के लिए चाहिए और कितने साल निवेश करना है।
- ऐसी SIP चुनें जिसकी किस्त हर महीने आसानी से भरी जा सके। जरूरत से ज्यादा निवेश करने से बचें।
- बाजार में गिरावट आने पर SIP बंद करने की जल्दबाजी न करें। लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है।
- सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर फंड न चुनें। फंड का प्रदर्शन, खर्च और पोर्टफोलियो समय-समय पर चेक करें।
- आय बढ़ने के साथ SIP की रकम भी बढ़ाते रहें। Step-up SIP से निवेश बढ़ता है और लक्ष्य जल्दी हासिल करने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें।